कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को खुलेआम दावत मिल रही है और तुम मुस्करा रही हो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को खुलेआम दावत मिल रही है और तुम मुस्करा रही हो
अवश्य हरायेंगे और फिर से देश को महामारी के संकट से बचाएँगे। अवश्य हरायेंगे और फिर से देश को महामारी के संकट से बचाएँगे।
इतना सुनते ही मानो दोनों मॉ - बेटे को लकवा मार गया.....। इतना सुनते ही मानो दोनों मॉ - बेटे को लकवा मार गया.....।
हम यहाँ रुके तो बीमारी से तो शायद बच भी जाएं लेकिन भूख से जरूर मर जाएंगे।“ हम यहाँ रुके तो बीमारी से तो शायद बच भी जाएं लेकिन भूख से जरूर मर जाएंगे।“
एक स्त्री के अंदर तीन आत्माओं का प्रवेश और कैसे उससे छुटकारा दिलाने में स्त्री का पिता साथ निभाता है... एक स्त्री के अंदर तीन आत्माओं का प्रवेश और कैसे उससे छुटकारा दिलाने में स्त्री क...
आख़िर धर्म से तो उनकी विवाहिता हूँ। वे धर्म नहीं निभा पाये यह बात दीगर है। कुमार साहब अब भी मेरे लिय... आख़िर धर्म से तो उनकी विवाहिता हूँ। वे धर्म नहीं निभा पाये यह बात दीगर है। कुमार...